38 साल बाद: सियाचिन में मिला लांसनायक चंद्रशेखर का पार्थिव शरीर, ग्लेशियर की चपेट में आने से हुए थे शहीद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 15 Aug 2022 10:53 AM IST
भारत और पाकिस्तान के बीच सियाचिन को
लेकर हुई झड़प में शामिल रहे 19 कुमाऊं रेजीमेंट के लांसनायक चंद्रशेखर
हर्बोला का पार्थिव शरीर 38 साल बाद सियाचिन में मिला है। इसकी सूचना सेना
की ओर से उनके परिजनों को दी गई है। बताया जा रहा है कि सोमवार को उनका
पार्थिव शरीर हल्द्वानी लाया जाएगा। इसके बाद सैनिक सम्मान के साथ शहीद का
अंतिम संस्कार किया जाएगा।
शहीद चंद्रशेखर: 38 साल बाद भी बर्फ से सुरक्षित मिला पार्थिव शरीर, हाथ में बंधे ब्रेसलेट से हुई पहचान
मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट के हाथीगुर बिंता निवासी चंद्रशेखर हर्बोला 19 कुमाऊं रेजीमेंट में लांसनायक थे। वह 1975 में सेना में भर्ती हुए थे। 1984 में भारत और पाकिस्तान के बीच सियाचिन के लिए युद्ध लड़ा गया था। भारत ने इस मिशन का नाम ऑपरेशन मेघदूत रखा था।
शहीद चंद्रशेखर: पथराई आंखों से 38 साल किया पति का इंतजार, पत्नी बोली- विश्वास था अंतिम दर्शन जरूर करूंगी
भारत की ओर से मई 1984 में सियाचिन में पेट्रोलिंग के लिए 20 सैनिकों की टुकड़ी भेजी गई थी। इसमें लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला भी शामिल थे। सभी सैनिक सियाचिन में ग्लेशियर टूटने की वजह से इसकी चपेट में आ गए जिसके बाद किसी भी सैनिक के बचने की उम्मीद नहीं रही।
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मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट के हाथीगुर बिंता निवासी चंद्रशेखर हर्बोला 19 कुमाऊं रेजीमेंट में लांसनायक थे। वह 1975 में सेना में भर्ती हुए थे। 1984 में भारत और पाकिस्तान के बीच सियाचिन के लिए युद्ध लड़ा गया था। भारत ने इस मिशन का नाम ऑपरेशन मेघदूत रखा था।
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भारत की ओर से मई 1984 में सियाचिन में पेट्रोलिंग के लिए 20 सैनिकों की टुकड़ी भेजी गई थी। इसमें लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला भी शामिल थे। सभी सैनिक सियाचिन में ग्लेशियर टूटने की वजह से इसकी चपेट में आ गए जिसके बाद किसी भी सैनिक के बचने की उम्मीद नहीं रही।
भारत सरकार और सेना की ओर से सैनिकों को
ढूंढने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इसमें 15 सैनिकों के पार्थिव शरीर
मिल गए थे लेकिन पांच सैनिकों का पता नहीं चल सका था। रविवार को रानीखेत
स्थित सैनिक ग्रुप केंद्र की ओर से शहीद चंद्रशेखर हर्बोला के परिजनों को
सूचना भेजी गई कि उनका पार्थिव शरीर सियाचिन में मिला है। उनके साथ एक और
सैनिक का पार्थिव शरीर मिलने का सूचना मिली है।
चंद्रशेखर की पत्नी वीरांगना शांति देवी
इस समय हल्द्वानी में धान मिल के पास सरस्वती विहार कॉलोनी में रहती हैं।
एसडीएम मनीष कुमार और तहसीलदार संजय कुमार रविवार को उनके घर पहुंचे।
उन्होंने परिजनों को प्रशासन की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
ये 20 सैनिक हुए थे हादसे का शिकार
1- पीएस पुंडीर, जिला-इलाहाबाद
2- मोती सिंह, जिला- पिथौरागढ़
3- गोविंद बल्लभ, जिला-अल्मोड़ा
4- भगवत सिंह, जिला-अल्मोड़ा
5- दयाकिशन, जिला-नैनीताल
6- राम सिंह, जिला-नैनीताल
7- चंद्र शेखर हर्बोला, जिला-अल्मोड़ा
8- चंद्रशेखर, जिला-पिथौरागढ़
9- जगत सिंह, जिला-पिथौरागढ़
10- गंगा सिंह, जिला-अल्मोड़ा
11- महेंद्र पाल सिंह, जिला-पिथौरागढ़
12- जगत सिंह, जिला-पिथौरागढ़
13- हयात सिंह, जिला-पिथौरागढ़
14- भूपाल सिंह, जिला-पिथौरागढ़
15- नरेंद्र सिंह, जिला-पिथौरागढ़
16- राजेंद्र सिंह, जिला-अल्मोड़ा
17- भीम सिंह, जिला-पिथौरागढ़
18- मोहन सिंह भंडारी, जिला-अल्मोड़ा
19- पुष्कर सिंह, जिला-पिथौरागढ़
20- जगदीश चंद्र, जिला-पिथौरागढ़
1- पीएस पुंडीर, जिला-इलाहाबाद
2- मोती सिंह, जिला- पिथौरागढ़
3- गोविंद बल्लभ, जिला-अल्मोड़ा
4- भगवत सिंह, जिला-अल्मोड़ा
5- दयाकिशन, जिला-नैनीताल
6- राम सिंह, जिला-नैनीताल
7- चंद्र शेखर हर्बोला, जिला-अल्मोड़ा
8- चंद्रशेखर, जिला-पिथौरागढ़
9- जगत सिंह, जिला-पिथौरागढ़
10- गंगा सिंह, जिला-अल्मोड़ा
11- महेंद्र पाल सिंह, जिला-पिथौरागढ़
12- जगत सिंह, जिला-पिथौरागढ़
13- हयात सिंह, जिला-पिथौरागढ़
14- भूपाल सिंह, जिला-पिथौरागढ़
15- नरेंद्र सिंह, जिला-पिथौरागढ़
16- राजेंद्र सिंह, जिला-अल्मोड़ा
17- भीम सिंह, जिला-पिथौरागढ़
18- मोहन सिंह भंडारी, जिला-अल्मोड़ा
19- पुष्कर सिंह, जिला-पिथौरागढ़
20- जगदीश चंद्र, जिला-पिथौरागढ़
- मनीष कुमार सिंह, एसडीएम, हल्द्वानी
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